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फैटी लीवर: समझें और बचाव करें

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फैटी लीवर के प्रकार फैटी लीवर (fatty liver) एक ऐसी स्थिति है जिसमें लीवर में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है। स्वस्थ लिवर में वसा की मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन जब यह लिवर के कुल वजन के 5% से अधिक हो जाती है, तो इसे 'फैटी लिवर' कहा जाता है। यह कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि मोटापा , मधुमेह , उच्च कोलेस्ट्रॉल और अत्यधिक शराब पीना। मुख्य रूप से दो प्रकार के फैटी लीवर होते हैं:  अल्कोहोलिक फैटी लीवर:(AFLD)   यह अधिक मात्रा में शराब पीने के कारण होता है।​जैसा कि नाम से पता चलता है, यह अत्यधिक शराब के सेवन के कारण होता है। शराब को तोड़ने की प्रक्रिया में लिवर में हानिकारक पदार्थ बनते हैं जो लिवर कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं और वसा के जमाव को बढ़ाते हैं। ​ शुरुआती चरण: शराब छोड़ देने पर यह स्थिति अक्सर ठीक हो जाती है। ​ गंभीर चरण: यदि शराब पीना जारी रखा जाए, तो यह अल्कोहलिक हेपेटाइटिस और अंततः लिवर सिरोसिस में बदल सकता है।  नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लीवर (NAFLD):  यह उन लोगों में होता है जो अधिक शराब नहीं पीते हैं। NAFLD आमतौर पर मोटापे, टाइप 2 डायबिटीज और उच्च ...

खाली पेट ​खजूर खाने के फायदे (empty stomach dates benefits):औषधीय गुण

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खजूर का संक्षिप्त परिचय: Empty stomach dates benefits खजूर (Date Palm) एक अत्यंत पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर फल है, जिसे "रेगिस्तान का मेवा" (Dryfruit of desert) भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से खाड़ी देशों और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में पाया जाता है।​यहाँ खजूर का संक्षिप्त परिचय दिया गया है: खजूर(dates) का वनस्पतिक या​ वैज्ञानिक नाम,फीनिक्स डैक्टिलिफेरा (Phoenix dactylifera) है। ​ खजूर का पेड़ काफी ऊँचा (करीब 15 से 25 मीटर) होता है और इसकी पत्तियाँ लंबी व कटीली होती हैं। यह दुनिया के सबसे पुराने खेती किए जाने वाले फलों में से एक है, जिसका इतिहास लगभग 5,000 साल पुराना है। ​खजूर अपनी मिठास और बनावट के आधार पर कई प्रकार का होता है। इसकी मुख्य किस्में इस प्रकार है: ​ अजवा : यह सबसे उत्तम किस्म का खजूर माना जाता है, जो गहरे रंग का और नरम होता है। ​ मेद्जूल (Medjool) : इसे 'खजूरों का राजा' कहते हैं क्योंकि यह खजूर आकार में बड़ा और बहुत मीठा होता है। ​ किमिया : यह अपनी कोमलता और गहरे काले रंग के लिए प्रसिद्ध है। ​खजूर के पोषक तत्व(nutrition in dates) ​खजूर पोषक तत...

त्रिफला चूर्ण का फायदा/triphala churn ka fayada

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  त्रिफला क्या होता है?( trifala kya hota hai )  त्रिफला चूर्ण का फायदा जानने से पहले यह जानना आवश्यक है,की त्रिफला क्या होता है? त्रिफला(triphala) का संधि विच्छेद होता है त्रि+फल अर्थात त्रिफला तीन फलों के चूर्ण का मिश्रण होता है। त्रिफला चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है,जो मनुष्य को अनेक प्रकार के रोगों से बचाती है और स्वस्थ बनाए रखती है।  त्रिफला का चूर्ण मूल रूप से तीन फलों हरड(हरितकी) ,बहेड़ा(विभितकी) और आंवला(आंमलकी) के फलों के पाउडर का एक आयुर्वेदिक मिश्रण है। आयुर्वेद के अनुसार यह चूर्ण शरीर में वात पित्त और कफ को संतुलित करता है।   त्रिफला चूर्ण बनाने की तरीका त्रिफला आयुर्वेद की एक जानी-मानी स्वास्थ्यप्रद औषधि है। इसके फायदे के बारे में हर कोई जानता है।त्रिफला को बनाने के लिए हरड़,बहेड़ा और आंवला के फलों को छाया में सुखाया जाता है।उसके पश्चात तीनों फलों का अलग-अलग पाउडर बना लिया जाता है।फिर इन फलों के चूर्ण को 1:2:3 अर्थात एक भाग हरड़,दो भाग बहेड़ा और तीन भाग आंवला के चूर्ण को मिलकर एक मिश्रण तैयार कर लिया जाता है।इस मिश्रण को ही त्रिफला चूर्ण कहा जाता है।...

पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय

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 पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय पेट की गैस एक आम समस्या है, जिससे कई लोग परेशान रहते हैं। इसे कम करने और जड़ से खत्म करने के लिए आप कुछ उपाय कर सकते हैं।  पेट की गैस को जड़ से खत्म करने के उपाय खानपान में बदलाव  * फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों का धीरे-धीरे सेवन: फाइबर पेट की सेहत के लिए जरूरी है, लेकिन बहुत ज्यादा फाइबर एक बार में लेने से गैस बन सकती है। इसलिए फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को धीरे-धीरे अपने आहार में शामिल करें।  * गैस पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों से परहेज: बीन्स, ब्रोकली, गोभी, प्याज आदि खाद्य पदार्थों से गैस बन सकती है। इसलिए इन्हें कम मात्रा में या बिल्कुल न खाएं।  * कार्बोनेटेड पेय और शराब से परहेज: इनमें कार्बन डाइऑक्साइड होता है, जिससे पेट में गैस बन सकती है।  * छोटे-छोटे हिस्से में खाएं: एक बार में बहुत ज्यादा खाने से पेट फूल सकता है और गैस बन सकती है।  * खाना खाते समय पानी न पिएं: खाने के साथ पानी पीने से पेट में गैस बन सकती है। जीवनशैली में बदलाव  * ध्यान और योग: तनाव गैस की समस्या को बढ़ा सकता है। ध्यान और योग करने से...

Nahane ke niyam। बिना सोचे समझे नहाना, पड़ सकता है भारी

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Nahane ke niyam। बिना सोचे समझे नहाना, पड़ सकता है भारी Nahane ke niyam हिंदू धर्म में किसी भी कार्य को करने के लिए तन और मन से पवित्र होना जरूरी माना गया है और इसके लिए प्रतिदिन नहाने का नियम बनाया गया है लेकिन क्या आप जानते हैं कि नहाने के भी कुछ नियम कायदे होते है। कब नहाना और कब नहीं ? क्या निर्वस्त्र होकर स्नान करना सनातन संस्कृति के अनुसार शुभ है या अशुभ? किन कार्यों को करते ही तुरंत स्नान नहीं करना चाहिए?  इन सभी सवालों के जवाब और इनके पीछे के विज्ञान  को विस्तार से समझने का प्रयास करते हैं।  अगर हम इन नियमों की अनदेखी तो हमारी सेहत पर इसका बुरा असर पड़ता है। हम सर्दी- खांसी या सिर दर्द का शिकार हो सकते हैं। यदि नियमित रूप से ऐसा किया तो पैरालिसिस के मरीज भी बन सकते हैं।  आयुर्वेद के अनुसार नहाने के नियम आयुर्वेद में स्नान के बारे में स्पष्ट दिशानिर्देश दिये गए है जिनका पालन हमें करना चाहिए।  नहाने के नियम में पहला नियम है, शुरुआत अपने हाथ और पैरों को धोने से करें। अगर आप ठंडे पानी से नहा रहे हैं तो आपको शुरुआत सिर से पांव से करनी चाहिए। और...

Eye Flu Treatment in hindi - आई फ्लू का इलाज

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आई फ्लू क्या है (eye flu kya hai)  Eye flu treatment in hindi आई फ्लू (eye flu) जिसे हम आँख आने के नाम से जानते है एक आम संक्रमण है,जिसका सामना हम सभी ने कभी न कभी किया होगा।  इस संक्रमण में आंखों में जलन होती है।ऑय फ्लू (eye flu treatment) का इलाज कैसे करना चाहिए,ये कम ही लोग जानते और समझते हैं। आँखों के संक्रमण के कई कारण हो सकते हैं, पर इसका मुख्य कारण हैं,छोटे जीवाणु और वायरस से हुआ संक्रमण।  आमतौर पर यह एक एलर्जिक रिएक्शन की वजह से होता है। लेकिन कई मामलों में बैक्टीरिया का संक्रमण भी इसके लिए जिम्मेदार होता है। कभी कभी ऐसे संक्रमण आँखों में कुछ चले जाने की वजह से होते हैं जैसे धुल या गन्दगी।  जो लोग खराब लेंस पहनते हैं उनके भी इस संक्रमण के शिकार होने की संभावना काफी ज़्यादा रहती है। इस संक्रमण की शुरुआत एक आंख से ही होती है, लेकिन जल्द ही दूसरी आंख भी इसकी चपेट में आ जाती है। आँखों का संक्रमण या ऑय फ्लू साधारणतः मौसम में परिवर्तन के साथ देखा जाता है। यह ठंड मौसम या बरसात के मौसम में ज्यादातर होता है | यह एक संक्रामक बीमारी है, जो किसी भी व्यक्ति को हो सकता है।...

Natural ways for black hair without dye । सफेद बाल काले करने का नेचुरल तरीका

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नैचरल तरीके से बाल काले कैसे करें?(how to make hair black with natural ways) उम्र बढ़ने के साथ बालों का सफ़ेद होना तो आम बात है, लेकिन प्रश्न यह है कि सफेद होते बालों को काला कैसे किया जाये।क्या बालों को नैचुरल तरीके से बिना डाय के काला किया जा सकता है। आजकल की जीवनशैली में कम उम्र में ही लोगों के बाल सफ़ेद होने लगे है। बालों के स्वास्थ्य के लिए केरोटिन मुख्य प्रोटीन है,जो बालों का निर्माण करता है, उन्हें स्वस्थ बनाता है। जब केराटिन में मेलेनिन की कमी हो जाती है तो बाल सफेद होने लगते हैं। बालों पर उपयोग किये जाने वाले केमिकल्स ने बालों के स्वास्थ्य को बिगाड़ दिया है तो आप अपने बालों को नेचुरल तरीके से काला कैसे कर सकते है, आइये जानते हैं । Natural ways for black hair without dye 1.  बालों  को काला करने के लिए अंडा लगाएं बालों को नैचुरल तरीके से काला करने के लिए अंडा बहुत फायदेमंद होता है।अंडा  प्रोटीन से भरपूर होता है यह बालों के लिए बहुत फायदेमंद होता है। आप अंडे का हेयर मास्क बनाकर बालों में प्रयोग कर सकते हैं। इसके लिए बस आपको सरसों, नारियल या जैतून के तेल में अं...