सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

Pet dard ke Karan। पेट दर्द हो सकता है, गंभीर बीमारी का संकेत

पेट दर्द क्यों होता है? (Pet dard kyon hota hai) 

पेट दर्द एक आम समस्या है, पेट दर्द का कारण अनियमित जीवनशैली,खराब खान-पान,लंबी सिटिंग, शारीरिक निष्क्रियता आदि हो सकते हैं।लेकिन जब पेट दर्द(pet dard) लंबे समय तक बना रहे तो यह कई प्रकार की बीमारियों का संकेत हो सकता है।

Pet dard ke karn, pet dard ki vajah, pet dard kyon hota hai, causes of stomach ache,
Pet dard ke karan



पेट दर्द के साथ ही यदि बुखार,उल्टी,अचानक वजन का कम होना जैसी समस्याएं भी हो तो यह  अपेंडिसाइटिस,अल्सर,पथरी और आईबीएस की समस्या भी हो सकती है।दरअसल पेट के पास होने वाला दर्द पास के किसी अंग का दर्द भी हो सकता है।

पेट में होने वाले दर्द और उसके स्थान को यदि गौर से निरीक्षण किया जाए तो बीमारी को समझा जा सकता है।पेट में अलग-अलग स्थानों पर और अलग-अलग प्रकार से होने वाला दर्द बीमारी के बारे में स्पष्ट संकेत देता है।आप भी इन संकेतों को जानकर बीमारी को पहचान सकते हैं। 

नाभि के ऊपर पेट दर्द के कारण (pet dard ke karan) 

पेट में नाभि के ऊपर की तरफ हल्की जलन के साथ पेट दर्द पेप्टिक अल्सर के प्रमुख पहचान है।पेट में सूजन,डकार,भूख का घटना, वजन का कम होना इसके प्रमुख लक्षण हैं। पेप्टिक अल्सर पेट की परत या छोटी आंत के ऊपर एक घाव होता है। 

पेप्टिक अल्सर एच पाइलोरी वायरस, नॉनस्टेरॉयडल,एंटी इंफ्लेमेंटरी दवाइयों के उपयोग के कारण होता है। 

पेप्टिक अल्सर का उपचार एसिड कम करने वाले दवाइयों से होता है।लेकिन यह दवाइयां किसी विशेषज्ञ की निगरानी में ही ले। 

नाभि के नीचे पेट दर्द के कारण(Nabhi Ke Niche pet dard ke Karan) 

आईबीएस को इरिटेबल बाउल सिंड्रोम भी कहा जाता है।इसमें पेट फूलने,अधिक मात्रा में गैस के साथ,यदि नाभि के निचले हिस्से में ऐठन बनी रहती है।साथ ही कब्ज या फिर डायरिया की शिकायत हो तो आईबीएस हो सकता है।यह सबसे सामान्य गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल समस्या है। 

यह समस्या सामान्यतया मस्तिष्क और आंत के बीच के संचार के प्रभावित होने के कारण होती है। 

भोजन में अधिक फाइबर शामिल कर तरल पदार्थ की मात्रा बढ़ाएं,रोज 20 से 30 मिनट ब्रिस्क वॉक करें।इस प्रकार इस समस्या पर नियंत्रण किया जा सकता है। 

पेट के बीच में जलन या दर्द होना यानी हार्ट बर्न

पेट के बीच में जलन या दर्द अक्सर तेल मसाले वाले भारी भोजन के बाद होने वाली आम समस्या है।इसमें सबसे महत्वपूर्ण शब्द है जलन यानी बर्न।इसके अलावा मुंह में कड़वा पानी आना भी प्रमुख लक्षण है।इसे एसिड रिफ्लक्स भी कहते हैं।दरअसल अधपचा हुआ भोजन या तरल होता है।जिसमें पाचन में सहायता करने वाला पेट का एसिड मिला होता है।यह मिश्रित तरल आहार नली से होता हुआ गले की तरफ जाता है,जिससे जलन जैसा महसूस होता है। 

पेट के दाएं तरफ निचले हिस्से में पेट दर्द(pet dard ka karan)

हल्के बुखार,मतली और डायरिया के साथ यदि पेट के दाएं तरफ निचले हिस्से में तेज दर्द है,तो यह अपेंडिसाइटिस हो सकता है,।

इसका दर्द अक्सर पीछे की ओर मुड़ने अथवा गहरी सांस लेने छीकने या खांसने में होता है। 

संक्रमण के कारण अपेंडिक्स में सूजन आने पर फिर उसमें मवाद भर जाने के कारण पेट दर्द होता है।

अपेंडिसाइटिस का एकमात्र उपचार सर्जरी है। सर्जरी करके संक्रमित अपेंडिक्स को शरीर से निकाल दिया जाता है। 

पेट के निचले बाएं हिस्से में दर्द यानी डायवर्टिकुलाइटिस

पेट के निचले बाएं हिस्से में दर्द की समस्या मुख्यतः बड़ी आंत से जुड़ी होती है।तेज गेस के साथ यदि पेट के निकले बाएँ हिस्से में अचानक दर्द हो तो यह डायवर्टिकुलाइटिस हो सकता है।अधिकतर मामलों में 40 वर्ष की उम्र के बाद लोगों को यह समस्या होती है।

पाचन प्रणाली में छोटी थैलियों के बनने के कारण डायवर्टिकुलाइटिस की समस्या होती है। संक्रमण भी इस समस्या का एक कारण हो सकता है। 

डायवर्टिकुलाइटिस की समस्या को एंटीबायोटिक से ठीक किया जा सकता है।पेट दर्द के समय भोजन में हल्के और तरल पदार्थ का सेवन फायदेमंद होता है। 

उम्मीद है पेट दर्द के कारण(pet dard ke karan) की यह जानकारी आप लोगों के लिए फायदेमंद होगी।इस लेख में दी गई समस्त जानकारी विभिन्न स्रोतों से प्राप्त की गई है।लेखक इस जानकारी के संपूर्ण होने का दावा नहीं करता है


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

फैटी लीवर: समझें और बचाव करें

फैटी लीवर: समझें और बचाव करें फैटी लीवर (fatty liver) एक ऐसी स्थिति है जिसमें लीवर में अतिरिक्त वसा जमा हो जाती है। स्वस्थ लिवर में वसा की मात्रा बहुत कम होती है, लेकिन जब यह लिवर के कुल वजन के 5% से अधिक हो जाती है, तो इसे 'फैटी लिवर' कहा जाता है। यह कई कारणों से हो सकता है, जैसे कि मोटापा , मधुमेह , उच्च कोलेस्ट्रॉल और अत्यधिक शराब पीना। फैटी लीवर के प्रकार मुख्य रूप से दो प्रकार के फैटी लीवर होते हैं:  अल्कोहोलिक फैटी लीवर:(AFLD)   यह अधिक मात्रा में शराब पीने के कारण होता है।​जैसा कि नाम से पता चलता है, यह अत्यधिक शराब के सेवन के कारण होता है। शराब को तोड़ने की प्रक्रिया में लिवर में हानिकारक पदार्थ बनते हैं जो लिवर कोशिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं और वसा के जमाव को बढ़ाते हैं। ​ शुरुआती चरण: शराब छोड़ देने पर यह स्थिति अक्सर ठीक हो जाती है। ​ गंभीर चरण: यदि शराब पीना जारी रखा जाए, तो यह अल्कोहलिक हेपेटाइटिस और अंततः लिवर सिरोसिस में बदल सकता है।  नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लीवर (NAFLD):  यह उन लोगों में होता है जो अधिक शराब नहीं पीते हैं। NAFLD आमतौर पर मो...

त्रिफला चूर्ण का फायदा/triphala churn ka fayada

  त्रिफला क्या होता है?( trifala kya hota hai )  त्रिफला चूर्ण का फायदा जानने से पहले यह जानना आवश्यक है,की त्रिफला क्या होता है? त्रिफला(triphala) का संधि विच्छेद होता है त्रि+फल अर्थात त्रिफला तीन फलों के चूर्ण का मिश्रण होता है। त्रिफला चूर्ण एक आयुर्वेदिक औषधि है,जो मनुष्य को अनेक प्रकार के रोगों से बचाती है और स्वस्थ बनाए रखती है।  त्रिफला का चूर्ण मूल रूप से तीन फलों हरड(हरितकी) ,बहेड़ा(विभितकी) और आंवला(आंमलकी) के फलों के पाउडर का एक आयुर्वेदिक मिश्रण है। आयुर्वेद के अनुसार यह चूर्ण शरीर में वात पित्त और कफ को संतुलित करता है।   त्रिफला चूर्ण बनाने की तरीका त्रिफला आयुर्वेद की एक जानी-मानी स्वास्थ्यप्रद औषधि है। इसके फायदे के बारे में हर कोई जानता है।त्रिफला को बनाने के लिए हरड़,बहेड़ा और आंवला के फलों को छाया में सुखाया जाता है।उसके पश्चात तीनों फलों का अलग-अलग पाउडर बना लिया जाता है।फिर इन फलों के चूर्ण को 1:2:3 अर्थात एक भाग हरड़,दो भाग बहेड़ा और तीन भाग आंवला के चूर्ण को मिलकर एक मिश्रण तैयार कर लिया जाता है।इस मिश्रण को ही त्रिफला चूर्ण कहा जाता है।...

खाली पेट ​खजूर खाने के फायदे (empty stomach dates benefits):औषधीय गुण

खजूर का संक्षिप्त परिचय: Empty stomach dates benefits खजूर (Date Palm) एक अत्यंत पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर फल है, जिसे "रेगिस्तान का मेवा" (Dryfruit of desert) भी कहा जाता है। यह मुख्य रूप से खाड़ी देशों और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्रों में पाया जाता है।​यहाँ खजूर का संक्षिप्त परिचय दिया गया है: खजूर(dates) का वनस्पतिक या​ वैज्ञानिक नाम,फीनिक्स डैक्टिलिफेरा (Phoenix dactylifera) है। ​ खजूर का पेड़ काफी ऊँचा (करीब 15 से 25 मीटर) होता है और इसकी पत्तियाँ लंबी व कटीली होती हैं। यह दुनिया के सबसे पुराने खेती किए जाने वाले फलों में से एक है, जिसका इतिहास लगभग 5,000 साल पुराना है। ​खजूर अपनी मिठास और बनावट के आधार पर कई प्रकार का होता है। इसकी मुख्य किस्में इस प्रकार है: ​ अजवा : यह सबसे उत्तम किस्म का खजूर माना जाता है, जो गहरे रंग का और नरम होता है। ​ मेद्जूल (Medjool) : इसे 'खजूरों का राजा' कहते हैं क्योंकि यह खजूर आकार में बड़ा और बहुत मीठा होता है। ​ किमिया : यह अपनी कोमलता और गहरे काले रंग के लिए प्रसिद्ध है। ​खजूर के पोषक तत्व(nutrition in dates) ​खजूर पोषक तत...