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Heart structure and function। मानव हदय संरचना और कार्य ।

मानव हृदय (human heart) 

मानव हृदय की संरचना(heart structure)


प्रस्तुत लेख में आपको heart structure and function की संपूर्ण जानकारी बहुत ही सरल तरीके से प्रदर्शित की गई है। कला विज्ञान या वाणिज्य किसी भी विषय का विद्यार्थी या सामान्य व्यक्ति भी heart structure and function का ज्ञान प्राप्त कर सकता है।
मानव हृदय एक पेशीय अंग होता है,जो कार्डिएक पेशियों का बना होता है।यह हमारे शरीर में दोनों फेफड़ों के बीच कुछ बाईं और डायाफ्राम के उपर स्थित होता है।यह हमारी फसलियों द्वारा सुरक्षित होता है।यह थोड़ा बाईं और झुका हुआ होता है।


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Heart structure and function। कैसा होता है मानव हदय और कैसे कार्य करता है।
मानव हृदय एक आवरण द्वारा घिरा होता है,जिसे परिकार्डियम कहते है यह एक त्रिस्तरीय झिल्ली होती है जिसके बीच में परिकार्डियल द्रव भरा होता है जो हृदय को आघात और रगड़ से बचाता है।
मानव हृदय  का आकार मुठ्ठी जितना होता है।यह एक मिनट में सामान्यतया 72 बार धड़कता है,किन्तु इसकी परास 70से90 धड़कन भी होती है।यह एक मिनट में 70 मिलीलीटर रक्त पंप करता है।पुरुषों में इसका भार 290-340ग्राम,जबकि महिलाओं में इसका भार 240-270ग्राम तक होता है।
  मनुष्य का हृदय दाएं और बाएं दो भागो में बांटा गया है। दाएं भाग में अशुद्ध रक्त और बाएं भाग में शुद्ध रक्त होता है। दोनों भाग दो दो कक्षों में विभाजित होते है । बायां भाग बाएं आलिंद और बाएं निलय मे तथा दायां भाग दाएं आलिंद और निलय में।
  हृदय का दायां और बायां भाग एक मांसपेशी द्वारा विभाजित होता है जिससे शुद्ध और आशुद्घ रक्त आपस में नही मिल पाते है।इसी तरह बायां भाग और दायां भाग के कक्ष एक दूसरे से वाल्व द्वारा विभाजित होते है,ये वाल्व रक्त को विपरीत दिशा में जाने से रोकते है।ये रक्त को केवल आलिंद से निलय म आने देते है,निलय से आलिंद में नहीं जाने देते है।
इसी प्रकार धमनियों तथा शिराओं और दोनों निलयों के मध्य भी वाल्व पाए जाते है। जो रक्त को विपरीत दिशा में जाने से रोकते हैं,अर्थात वापस निलयो में नहीं आने देते हैं।

  मानव हृदय की कार्य प्रणाली

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Heart function diagram
मनव हृदय की सरंचना  चार कक्षिय होता है।दाएं आलिंद से जुड़ी हुईं उपरी तथा निचली महाशिरा होती है जो अशुद्ध रक्त को इकठठा कर दाएं आलिंद में डालती है।
 जब आलिंद भर जाता है तो आलिंद सिकुड़ता है और दबाव के कारण आलिंद निलय वाल्व खुल जाता है और रक्त निलय में चला जाता है।निलय भर जाने पर सिकुड़ता है और रक्त को फुफ्फुसीय महाधमनियों में पंप किया जाता है।और रक्त फेफडों में चला जाता है । जहां यह आक्सिजनित होकर फुफ्फुसीय महाशीर द्वारा बाएं आलिंद में आ जाता है।आलिंद में दबाव पड़ने पर रक्त बाएं निलय में प्रवेश कर जाता है। 
निलय रक्त से भर जाने पर सिकुड़ता है और रक्त महाधमनी म प्रवेश करता है और वहां से शरीर में धमनियों द्वारा पंप कर दिया जाता हैं।
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